Indian Polity (भारतीय राजव्यवस्था): भारतीय राजव्यवस्था के संबंध में विभिन्न जानकारी अपडेट की जाती है। इसमें भारतीय राजव्यवस्था से संबंधित नोट्स, शॉर्ट नोट्स और मैपिंग के द्वारा विस्तृत अध्ययन करवाया जाता है। क्वीज टेस्ट के माध्यम से अपनी तैयारी पर रखने का बेहतरीन अवसर। आज ही अपनी तैयारी को दमदार बनाने के लिए पढ़िए भारतीय राजव्यवस्था।
प्रमुख आयोग
नीति आयोग
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में योजना आयोग के स्थान पर एक नई संस्था लाने की घोषणा की
स्थापना
1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के तहत एक नई संस्था जिसे ‘राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान’ (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया- NITI) नाम दिया गया
इस संस्था को नीति आयोग के नाम से जानते हैं
प्रधानमंत्री के अध्यक्षता में यह आयोग सरकार के थिंक टैंक के रूप में कार्य करता है
यह आयोग केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों के लिए भी नीति निर्माण की भूमिका निभाता है
यह आयोग केंद्र सरकार और राज्य सरकार को, ऐसे मुद्दे जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के होते हैं, उनमें सलाह देने का कार्य करता है
नीति आयोग का स्वरूप
अध्यक्ष- भारत के प्रधानमंत्री
मुख्य कार्यकारी अधिकारी- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
गवर्निंग काउंसिल- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्य क्षेत्र के उपराज्यपाल
उपाध्यक्ष- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
पूर्णकालिक सदस्य- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
पदेन सदस्य- केंद्रीय मंत्री परिषद से
विशेष आमंत्रित सदस्य- प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
नीति आयोग के प्रथम अध्यक्ष, नरेंद्र मोदी है, प्रथम उपाध्यक्ष, अरविंद पनगढ़िया है और प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सिंधु श्री खुल्लर है नीति आयोग शासी परिषद की आठवीं बैठक 27/5/2023 को हुई थी इस समय थीम- विकसित भारत@ 2047: टीम इंडिया की भूमिका
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आयोग के साथ काम करने का आग्रह किया गया ताकि देश ‘अमृत काल’ के अपने दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सके
‘श्री अन्न’ को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग पर बल दिया
‘अमृत सरोवर’ कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर भी विचार विमर्श किया
प्रमुख सूचकांक
SDG सूचकांक
समग्र जल प्रबंधन सूचकांक
अटल नवाचार मिशन
SATH प्रोजेक्ट
आकांक्षी जिला कार्यक्रम
स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक
जिला अस्पताल सूचकांक
स्वास्थ्य सूचकांक
कृषि विपणन और किसान हितेषी सुधार सूचकांक
वूमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड
सुशासन सूचकांक
वर्तमान अध्यक्ष- श्री नरेंद्र मोदी वर्तमान उपाध्यक्ष- श्री सुमन बेरी वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी- B.V.R. सुब्रह्मण्य
वित्त आयोग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
वित्त आयोग
अनुच्छेद 280- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति प्रत्येक 5 वर्ष में एक वित्त आयोग का गठन करता है
इसी अनुच्छेद के तहत भारत में प्रथम वित्त आयोग का गठन वर्ष 1951 में किया गया था *- अनुच्छेद 243 I के तहत राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है
वित्त आयोग के प्रथम अध्यक्ष- K.C. नियोगी इसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं
यह आयोग निम्नलिखित कार्य करता है-
केंद्रीय करों में से राज्यों के हिस्सेदारी तय करना
भारत के संचित निधि में से राज्यों को दिए जाने वाले अनुदानों के मापदंड तय करना
स्थानीय निकायों के वित्तीय सशक्तिकरण के संदर्भ में सुझाव देना
वित्त आयोग अपने सिफारिश से राष्ट्रपति को देता है, जिसे राष्ट्रपति संसद में रखवाता है
आयोग की सिफारिश केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है
15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष- NK सिंह थे
अनुसूचित जाति आयोग
यह एक संवैधानिक निकाय है, जो भारत में अनुसूचित जातियों के हितों की रक्षा हेतु कार्य करता है
अनुच्छेद 338
इस अनुच्छेद में यह उल्लेखित था की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक आयुक्त होगा
65वें संविधान संशोधन, 1990 द्वारा किस अनुच्छेद में संशोधन करके राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का प्रावधान किया गया
89 वे संविधान संशोधन द्वारा वर्ष 2003 में S.C. और S.T. के लिए अलग-अलग गठन किया, जो वर्ष 2004 में लागू हुआ
S.C. आयोग का स्वरूप
इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं जिनके नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है
S.C. आयोग का कार्य
S.C. से संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की क्रियान्वयन पर निगरानी रखना
S.C. के लोगों पर अत्याचारों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करना
महत्वपूर्ण
आयोग संबंधित व्यक्ति को समन जारी कर सकता है
उसे अपनी गवाही शपथ पत्र पर देने के लिए कह सकता है
पुलिस में एफआईआर दर्ज करने को यह कह सकता है
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के वर्तमान अध्यक्ष- श्री विजय सापला
अनुसूचित जनजाति आयोग
वर्ष 2004 में 89 वे संविधान संशोधन के द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 338 A नमक नया अनुच्छेद जोड़ा गया
अनुच्छेद 338 A
इस अनुच्छेद के तहत ‘अनुसूचित जनजाति आयोग’ का गठन किया गया
आयोग का स्वरूप
इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है
इसमें राष्ट्रपति द्वारा एक महिला के नियुक्ति की जाती है
S.T. आयोग के कार्य
अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रदत सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच एवं निगरानी करना
S.T. के सामाजिक आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना
आयोग सुरक्षा उपायों के संचालन के बारे में राष्ट्रपति को प्रतिवर्ष रिपोर्ट प्रदान करेगा
अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम, 2022
अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम 2022 लोकसभा तथा राज्यसभा में क्रमशः 28 मार्च और 6 अप्रैल 2022 को पारित की गई
18 अप्रैल 2022 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई
प्रस्तुत अधिनियम में त्रिपुरा की अनुसूचित जनजातियों की सूची में कुकी जनजाति की उपजाति के रूप में दारलोंग समुदाय को सम्मिलित किया गया है श्री हर्ष चौहान- वर्तमान राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष हैं
लोक सेवा आयोग / पब्लिक सर्विस कमिशन
स्थापना
भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत सर्वप्रथम सन 1926 में ‘लोक सेवा आयोग’ की स्थापना की गई
भारत सरकार अधिनियम 1935 के अधीन लोक सेवा आयोग के कार्यों को विस्तारित किया गया
अनुच्छेद 315
भारतीय संविधान के इस अनुच्छेद के अंतर्गत लोक सेवा आयोग का गठन किया गया
संघ के लिए- संघ लोक सेवा आयोग राज्य के लिए- राज्य लोक सेवा आयोग
संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, उन्हें हटाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है
राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है
लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल
संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष होता है
राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष होता है
लोक सेवा आयोग के कार्य
संघ/राज्य के सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का आयोजन
भारती के तरीके के संदर्भ में सरकार को सुझाव देना
भारती में अनुशासनात्मक कार्यवाही, स्थानांतरण, पदोन्नति आदि के संदर्भ में सरकार को सलाह देना
लार्ड कार्नवालिस - इनको भारत में लोक सेवाओं का जनक कहा गया सरदार वल्लभभाई पटेल- इनको अखिल भारतीय सेवाओं का जनक कहा जाता है
भारत के प्रमुख लोक सेवाएं
1.अखिल भारतीय सेवाएं
प्रशासनिक सेवाएं (IAS)
भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
भारतीय वन सेवा (IFS)
2.केंद्रीय सेवाएं
भारतीय विदेश सेवा
भारतीय आबकारी सेवा
भारतीय रेलवे अभियंता सेवा
भारतीय चुंगी एवं केंद्रीय एक्साइज सेवा
भारतीय ऑडिट एवं अकाउंट सेवा
भारतीय प्रतिरक्षा अकाउंट सेवा
भारतीय डाक सेवा
भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा
भारतीय अध्यादेश फैक्टरीज सेवा
केंद्रीय सूचना सेवा
राज्यों की सेवाएं
राज्य प्रशासनिक सेवाएं
राज्य पुलिस सेवा
राज्य ऑडिट एवं अकाउंट सेवा
राज्य शिक्षा सेवा
राज्य को ऑपरेटिव सेवा
राज्य नियोजन सेवा
राज्य कारागार सेवा
राज्य वाणिज्य कर सेवा
निर्वाचन आयोग
अनुच्छेद 324
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 में यह उल्लेखित है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा तथा विधान परिषद के चुनाव करवाने के लिए एक चुनाव आयोग होगा
25 जनवरी 1950- इस स्थिति को वर्तमान चुनाव आयोग अस्तित्व में आया
*- वर्ष 2009 से 25 जनवरी को मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है
इस आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य आयुक्त होते हैं
इन सभी के नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष तथा 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति होती है
अन्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल- 6 वर्ष या 62 वर्ष होती है
संविधान में उनकी योग्यता का उल्लेख नहीं है
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को इस पद पर नियुक्त किया जाता है
राज्य निर्वाचन अधिकारी
प्रत्येक राज्य में चुनाव आयोग के प्रतिनिधित्व के रूप में कार्य करता है
चुनाव आयोग के कार्य
चुनाव करवाना
निर्वाचन क्षेत्र का और स्थान का निर्धारण करना
सांसद तथा विधानमंडल के सदस्यों की निर्योग्यता के संबंध में राष्ट्रपति को सिफारिश से करना
राजनीतिक दलों को मान्यता देना तथा उन्हें चुनाव चिन्ह प्रदान करना
61वा संविधान संशोधन वर्ष 1989
इसके द्वारा लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मतदान करने की आयु 21 वर्ष से घटकर 18 वर्ष कर दी गई
राष्ट्रीय दल के दर्जे का आधार
लोकसभा अथवा विधानसभा के चुनावो में कुल वैध मतों का 6% प्राप्त करने तथा लोकसभा की चार सीट प्राप्त करने पर राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया जा सकता है
राज्य दल का दर्जा
विधानसभा चुनाव में कुल वैध मतों का 6% तथा विधानसभा के दो सिम प्राप्त करने पर राज्य दल का दर्जा दिया जा सकता है
चुनाव सुधार समितियां
तारकुंडे समिति (1977) – अध्यक्ष V.M. तारकुंडे
दिनेश गोस्वामी समिति (1990) – अध्यक्ष दिनेश गोस्वामी
गुप्ता समिति (1998) – अध्यक्ष इंद्रजीत गुप्त
संविधान समीक्षा आयोग (2000) – अध्यक्ष M.N. वेंकटचलेया
EVM – इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन
इसका प्रथम बार प्रयोग वर्ष 1982 में केरल के विधानसभा क्षेत्र में किया गया
गोवा- वर्ष 1999 में संपूर्ण चुनाव करवाने वाला प्रथम राज्य
वर्ष 2009 में आम चुनाव तथा विधानसभाओं का चुनाव EVM से करवाया गया
NOTA (नॉन ऑफ द अबोव)
वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने PUCL V/S भारत संघ के मामले में निर्णय देते हुए कहा कि यदि मतदाता के द्वारा किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं किया जाता है तो वह ‘ इनमें से कोई नहीं’ विकल्प चुन सकता है
VVPAT
वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल
चुनाव खर्च सीमा
लोकसभा उम्मीदवार- 95 लाख रुपए
विधानसभा उम्मीदवार- 40 लाख रुपए
केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर के चार राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड में परिसीमन के लिए 6 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट की सेवा निवृत न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया
यह आयोग जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, के प्रावधानों के तहत जम्मू कश्मीर संघ राज्य के लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्र का परिसीमन करेगा
असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड के क्षेत्र का परिसीमन ‘परिसीमन कानून 2002’ के प्रावधानों के तहत किया जाएगा
5 मई 2022 को ‘जम्मू कश्मीर परिसीमन आयोग’ ने जम्मू कश्मीर के विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन पर तैयार की गई अपने अंतिम रिपोर्ट को जारी कर दिया
परिसीमन के पश्चात अब जम्मू कश्मीर विधान सभा की कुल सीटे 90 हो गई है, जिसमें कश्मीर संभाग में 47 तथा जम्मू संभाग में 43 विधानसभा सीटे निर्धारित की गई है
निर्वाचन विधि (संशोधन) अधिनियम 2016- 31 जुलाई 2015 से भारत एवं बांग्लादेश के मध्य बस्तियों की अदला-बदली के पश्चिम बंगाल के कुछबिहार जिले के विधानसभा और संसदीय क्षेत्र का सीमित रूप से परिसीमन किया गया
निर्वाचन विधि संशोधन अधिनियम 2021- यह अधिनियम संसद में लोकसभा द्वारा 20 दिसंबर 2021 को तथा राज्यसभा द्वारा 21 दिसंबर 2021 को पारित किया गया तथा 29 दिसंबर 2021 को राष्ट्रपति ने अपनी सहमति प्रदान की
इस अधिनियम के तहत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 एवं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन किया गया है
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य मतदाता के आधार को वोटर आईडी से लिंक करना है ताकि फर्जी मतदान के खतरे से बचा जा सके
अधिनियम में पत्नी शब्द के स्थान पर जीवनसाथी को अंत: स्थापित किया गया है
इसमें 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके मतदाता को एक कैलेंडर वर्ष में चार बार क्रमशः 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, और 1 अक्टूबर को अपना नामांकन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा
राजीव कुमार- वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
मानव के विकास के लिए कुछ अधिकार सभी को समान रूप से उपलब्ध होने चाहिए
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों पर सार्वभौम घोषणा पत्र जारी किया
मानव अधिकार संरक्षण, अधिनियम 1993- इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संरचना
यह एक बहुदलीय संस्था है
इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के सिफारिश पर की जाती है
अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल- 3 वर्ष या 70 वर्ष जो भी पहले हो
अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है, जो उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य
किसी न्यायालय में चल रही ऐसी कार्यवाही जिसमें मानवाधिकारों का उल्लंघन का आरोप है, उसे न्यायालय के सहमति से N.H.R.C. हस्तक्षेप कर सकता है
N.H.R.C. अधिकार के क्षेत्र में अनुसंधान करता है
आयोग के पास दीवानी अदालत की शक्तियां है
N.H.R.C. के पास मुआवजे या हरजाने के भुगतान के सिफारिश करने का अधिकार है
यह राज्य या केंद्र सरकार को मानवाधिकार के उल्लंघन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने के सिफारिश कर सकता है
न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ मिश्रा- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रथम अध्यक्ष 10 दिसंबर- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस अरुण कुमार मिश्रा- वर्तमान अध्यक्ष
अन्तर्राज्य परिषद
अनुच्छेद 263 - इस अनुच्छेद के तहत अन्तर्राज्य परिषद के निम्नलिखित कार्य है-
राज्यों के मध्य उत्पन्न होने वाले विवादों की जांच करना एवं निपटारे हेतु परामर्श देना
ऐसे विषयों की छानबीन करना जिसमें केंद्र एवं एक से अधिक राज्यों के सामूहिक हित निहित हो
केंद्र व राज्यों के मध्य सामंजस्य एवं समायोजन की भावना विकसित करना
स्थापना
वर्ष 1990 में सरकारिया आयोग की सिफारिश पर
प्रथम बैठक- 10 अक्टूबर 1990
अध्यक्ष- प्रधानमंत्री
मनोनीत सदस्य- छह सदस्य (प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत, कैबिनेट स्तर के मंत्री)
अन्य सदस्य- सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और संघ राज्य क्षेत्र के प्रशासक
बैठक- वर्ष में काम से कम तीन बार
महत्वपूर्ण
बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के द्वारा की जाती है
प्रधानमंत्री के अनुपस्थिति में प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त कैबिनेट स्तर का मंत्री बैठक की अध्यक्षता करता है
परिषद की बैठक में कम से कम 10 सदस्य उपस्थित होना अनिवार्य है
19 मई 2022 को केंद्र सरकार ने देश में ‘सहकारी संघवाद’ को बढ़ावा देने के लिए अन्तर्राज्य परिषद का पुनर्गठन किया
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में ‘अन्तर्राज्य परिषद’ की स्थाई समिति का भी पुनर्गठन किया गया, इस समिति में 13 सदस्य होंगे
राष्ट्रीय महिला आयोग
राष्ट्रीय महिला आयोग साविधिक निकाय है
इसका गठन भारतीय संसद द्वारा वर्ष 1990 में परित अधिनियम के तहत 31 जनवरी 1992 में किया गया
राष्ट्रीय महिला आयोग का उद्देश्य भारत में महिलाओं के अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक आवाज प्रदान करना है
आयोग ने दहेज, राजनीति, धर्म और नौकरियों में महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व तथा श्रम के लिए महिलाओं का शोषण को रोकने के लिए अपने अभियान में शामिल किया है
आयोग के कार्य
महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता से संबंधित मुद्दों पर अनुसंधान और समापन कार्य करता है
आयोग साक्ष आधारित नीति की अनुशंसाओं का समर्थन करने के लिए डाटा और सूचना एकत्र करता है
राष्ट्र महिला- आयोग द्वारा प्रकाशित मासिक हिंदी और अंग्रेजी भाषा में समाचार पत्र आयोग कानून के गैर अनुपालन से संबंधित मामले में स्वत संज्ञान ले भी सकता है
राष्ट्रीय महिला आयोग की संरचना
इसमें एक अध्यक्ष और पांच सदस्य होते हैं
जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है
इन पांच सदस्यों में एक व्यक्ति SC या ST का होगा
कार्यकाल- 3 वर्ष तथा पुनर्निर्वाचन भी हो सकता है
त्यागपत्र- अध्यक्ष और सदस्य अपना त्यागपत्र केंद्र सरकार को देते हैं
रेखा शर्मा- आयोग के वर्तमान अध्यक्ष 7 अगस्त 2018 से
जयंती पटनायक- आयोग की प्रथम अध्यक्ष (3 फरवरी 1992 से 30 जनवरी 1995 तक)
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग
वर्ष 1978 में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा पारित एक संकल्प में अल्पसंख्यक आयोग के स्थापना की परिकल्पना की गई थी
वर्ष 1992 में अल्पसंख्यक आयोग एक वैधानिक आयोग बन गया था
वर्ष 1993 में प्रथम अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया
इसमें पांच धार्मिक समुदायों को शामिल किया गया जो इस प्रकार है- मुस्लिम, ईसाई, सिख बौद्ध और पारसी सम्मिलित है वर्ष 2014 में इसमें जैन धर्म को सम्मिलित कर लिया गया
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की संरचना
इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच सदस्य होते हैं
इसको केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है
इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होता है
केंद्र सरकार को त्यागपत्र दे सकते हैं
आयोग के कार्य
देश में अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना
संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों की निगरानी करना
अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित कार्य करना
अल्पसंख्यकों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की विभेद से उत्पन्न होने वाली समस्याओं का निवारण करना
सरदार मोहम्मद अली खान- अल्पसंख्यक आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे